आमतौर पर सवा-ग्यारह पर सोने वाला यह लड़का अपनी मोहब्बत से मिलने स्टेशन जा रहा था। उसे फ्रूटी और आइस क्रीम गोपाल चचा की दुकान की बहुत पसंद थी। जो छूट गया अब। जो नही छूटा वह उसका नीला वाला कुर्ता था जो कटरा में खरीदा था डिस्काउंट पर। रात 1:20 की ट्रेन थी। मोटर साइकिल हवा में थी। उससे मिलने की बेचैनी बढ़ रही थी।
कई दिन पहले कंपनी बाग के घास पर बैठे -बैठे उसके हाथों को अपने हाथों में लेते हुए केदारनाथ सिंह जी एक पंक्ति कही थी।
"उसका हाथ
अपने हाथ में
लेते हुए मैंने सोचा
दुनिया को
हाथ की तरह गर्म
और सुंदर होना चाहिए।"
वाह! तुमने लिखी है क्या?
नहीं... केदारनाथ सिंह जी की हैं।
देख लेना यही हाथ हम लोगों का सदा के लिए जुड़ जाएगा।
शहर - इलाहाबाद

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