( यह कूड़ा मिलन विहार का है)
( ये भी! मिलन विहार बुराड़ी में पड़ता है)
ये तीनो फ़ोटो दिल्ली के बुराड़ी क्षेत्र के मिलन विहार से ली गयीं हैं। स्लम बस्ती की फ़ोटो है जिसका "विकास" कही लापता हो गया है। अरविंद केजरीवाल कहते है कि हमने दिल्ली में विकास किया है लेकिन यहाँ तो नही दिख रहा है। क्या ये भी केंद्र सरकार के अंतर्गत आता है? दिल्ली में कचरा बहुत है जहाँ जाईये वहाँ कचरा ही कचरा है अधिकतम जगहों पर।
अब तो चुनाव आ गया है तो इसपर नेताजी का ध्यान कहाँ से जाएगा। अभी तो उनका पूरा ध्यान आईटी सेल और जोड़-घटाव,गठबंधन पे होगा। और असली मुद्दों पे चुनाव कौन लड़ता है जी। जो ये लड़ जाएं।
जब भी चुनाव की बात करतें है तो सबसे पहले यही ध्यान आता है कि हमारे गली-मोहल्ले-गाँव-शहर की खराब व्यवस्था( जैसे - स्कूल, अस्पताल, कॉलेज, बदबूदार नालियां, किसानों की समस्याएं, फसलों का मूल्य न मिलना, कचहरी में काम ठीक से होना, भ्रष्टाचार कम होना)। इत्यादि इन सभी बातों को लेकर नेता अपने- अपने रैलियों में इसका मुद्दा उठाएंगे और उनकी सरकार बनने पर इसका निदान जल्द से जल्द कर सकेंगे। लेकिन होता इसका उल्टा है।
हमने पहले विकास शब्द का इस्तेमाल चुनावों में होता नही सुना या देखा। पहले इसको शिक्षा, पानी, बिजली,सड़क,गरीबी, अस्पताल और भी बहुत सारे हैं जिसको नेता बारी-बारी से गिनाते थे और कहते थे कि ये हटाओ, वो हटाओ और "गरीबी हटाओ"(जो हटा नही अब तक)। अब आप कहीं भी इन सब भागो को नही सुन सकते क्योंकि अब इन सबका समावेशीकरण "विकास" नामक वस्तु में हो गया है। अब हर जगह नेता विकास विकास का नारा बोलते रहते है और जनता से पूछते है कि बताईये विकास हुआ कि नही हुआ। बताईये न?
( ये भी! मिलन विहार बुराड़ी में पड़ता है)
ये तीनो फ़ोटो दिल्ली के बुराड़ी क्षेत्र के मिलन विहार से ली गयीं हैं। स्लम बस्ती की फ़ोटो है जिसका "विकास" कही लापता हो गया है। अरविंद केजरीवाल कहते है कि हमने दिल्ली में विकास किया है लेकिन यहाँ तो नही दिख रहा है। क्या ये भी केंद्र सरकार के अंतर्गत आता है? दिल्ली में कचरा बहुत है जहाँ जाईये वहाँ कचरा ही कचरा है अधिकतम जगहों पर।
अब तो चुनाव आ गया है तो इसपर नेताजी का ध्यान कहाँ से जाएगा। अभी तो उनका पूरा ध्यान आईटी सेल और जोड़-घटाव,गठबंधन पे होगा। और असली मुद्दों पे चुनाव कौन लड़ता है जी। जो ये लड़ जाएं।
जब भी चुनाव की बात करतें है तो सबसे पहले यही ध्यान आता है कि हमारे गली-मोहल्ले-गाँव-शहर की खराब व्यवस्था( जैसे - स्कूल, अस्पताल, कॉलेज, बदबूदार नालियां, किसानों की समस्याएं, फसलों का मूल्य न मिलना, कचहरी में काम ठीक से होना, भ्रष्टाचार कम होना)। इत्यादि इन सभी बातों को लेकर नेता अपने- अपने रैलियों में इसका मुद्दा उठाएंगे और उनकी सरकार बनने पर इसका निदान जल्द से जल्द कर सकेंगे। लेकिन होता इसका उल्टा है।
हमने पहले विकास शब्द का इस्तेमाल चुनावों में होता नही सुना या देखा। पहले इसको शिक्षा, पानी, बिजली,सड़क,गरीबी, अस्पताल और भी बहुत सारे हैं जिसको नेता बारी-बारी से गिनाते थे और कहते थे कि ये हटाओ, वो हटाओ और "गरीबी हटाओ"(जो हटा नही अब तक)। अब आप कहीं भी इन सब भागो को नही सुन सकते क्योंकि अब इन सबका समावेशीकरण "विकास" नामक वस्तु में हो गया है। अब हर जगह नेता विकास विकास का नारा बोलते रहते है और जनता से पूछते है कि बताईये विकास हुआ कि नही हुआ। बताईये न?


