भारतीय सिनेमा के रील लाइफ हो या हमारे जीवन के रियल लाइफ यहाँ महिलाओं को उनके पतियों के सर नेम से बुलाया/पुकारा जाता है। जैसे में - मिसेज सिंह, मिसेज मेहरा, मिसेज अग्रवाल, मिसेज राय, मिसेज मिश्रा और भी तमाम प्रकार के सर नेम से पुकारा जाता है।
एक तो हमारे समाज में कम ही महिलाएं अपनी जातियों व सामाजिक रूढ़िवादिता को तोड़कर अपने मेहनत के दम पर नाम व शोहरत कमा पाती हैं और उस पर से समाज की बोझी सोच व पुरुषवादिता के दम पर उनकी जिंदगी की सबसे बड़ी कमाई 'अथाह मेहनत' का गला उसी दिन घोंट देते हैं। जिस दिन उनके नाम से नही उनके पतियों के नाम से बुलाया जाने लगता हैं। भारत में इन नामों को बुलाने वालों की संख्या करोड़ो में है। जो हर राज्यों में है। चाहे वह विकसित हो या विकासशील।
क्या! यह कभी बदल पाएगा... पता नही। पर यह बात पुरुषों से अधिक उन मेहनतकश महिलाओं को सोचना चाहिए कि क्या अभी भी उनको किसी के सर नेम की जरूरत है या वह खुद अपना मुकाम हासिल कर ली हैं कि समाज उनको अपने नाम से बुलाये ना कि मिसेज सिंह, मिसेज दत्ता, मिसेज चतुर्वेदी या मिसेज कौर से।
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