शुक्रवार, 10 मई 2019

गाजीपुर चुनाव विश्लेषण!



वर्तमान समय में बीजेपी के उम्मीदवार मनोज सिन्हा और सपा + बसपा के गठबंधन के उम्मीदवार अफ़ज़ाल अंसारी हैं। 2014 में मनोज सिन्हा चुनाव जीतकर केंद्र में मंत्री बने थे। रेल राज्य और स्वतंत्र दूरसंचार मंत्री थे। इससे पहले भी 2 बार सांसद रह चुके हैं।
अगर जमीनी हकीकत को समझे तो यहाँ मनोज सिन्हा ने रेल और दूरसंचार में बहुत ढेरो काम करवाया हैं जो जिले में आजतक नही हो सका था। लेकिन जातिगत रणनीति की वजह से अभी ये सीट इधर-उधर हिलोरें मार रहीं है। आप खुद जमीनी पड़ताल कर सकतें हैं। अभी कुछ दिन पहले ही एक वीडियो वायरल हुआ था जिसमें मनोज सिन्हा कह रहे थे कि अगर उनके कार्यकर्त्ता पर किसी ने उंगली उठायी तो उसकी उंगली सलामत नहीं रहेगी। हालांकि सत्य सही है कि खुद उनके भतीजे और बीजेपी विधायक समेत दर्जनों हत्याएं हो चुकी हैं लेकिन अभी तक उन सभी का कुछ हुआ नहीं।

और उधर बाहुबली मुख़्तार अंसारी के भाई अफ़ज़ाल अंसारी हैं। जिनका गाजीपुर के इतिहास में हत्या,छिनैती, लूट, वसूली, कमीशन बाजी का वजूद रहा है। अफ़ज़ाल अंसारी सांसद और विधायक दोनों रह चुके हैं लेकिन काम कुछ भी नही करवाया है अपने कार्यकाल के दौरान। आप गाजीपुर में किसी से भी पूछ सकते है। और इनके परदादा मत जाइएगा। वे अच्छे थे लेकिन ये नही हैं। ये माफिया हैं।

चुनाव बस जीत हार की नहीं हो रही है। गाजीपुर में शांति चाहिए और इसके साथ - साथ यहाँ विकास भी चाहिए। जो अफ़ज़ाल अंसारी नही करवा सकते। अगर यह व्यक्ति चुनाव जीत जाता है तो भय, असुरक्षा का माहौल और दबंगई फिर से शुरू हो जाएगी।

सोचना आपको हैं? कि वोट किसे दें। आप खुद सोचें।

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