गुरुवार, 5 जुलाई 2018

                        ~ अधूरी यात्राएं ~ 


भोरहरी में डकनिया तालाब स्टेशन के रेलवे लाइन के पास बैठकर शौचालय करने में बड़ा आंनद देता। जब राजधानी दस - बारह मीटर दूर से सिटी बजाते हुए निकलती और पाछा सुन्न हो जाता। हाई स्कूल पास करने के बाद उससे पहला प्यार हुआ था। नही दूसरा था। छोटे शहरों का प्यार आप से नही तुम से हुआ करता था। यह उसने बताया। उन दिनों एक ऐसी अफवाहें उड़ा करती थी कि जो स्कूल का सबसे खतरनाक मास्टर हो, जो स्कूल में कहीं से भी गुजर जाए तो लौंडो में हलचल हो जाती, किसी के हवाओं में बाल नीचे बैठ जाते तो किसी के कान का पर्दा दर्द करने लगता। स्कूल की दीवारों से बात सुनकर मैंने भी ट्यूशन जॉइन कर लिया। पहली बार उससे वही मुलाकात हुई थी। शायद यह कथन सत्य ही था कि अगर आप उस मास्टर से ट्यूशन लेते है तो वह कम मारता है चाहे गलती आपकी ही क्यों न हो। उन दिनों ट्यूशन फीस चार सौ पचास रुपये हुआ करती थी। स्कूल की हवाईबाजी के लिए ट्यूशन में हाथों पर फुला देने वाले प्रसाद खाने को मिलें। मुझे यह उपहार ही मिला था। उसने उसको खूब गरियाया और अपनों होंठो से मेरे हाथ चूमने लगीं। 

    उसको सिगरा पे घूमना अच्छा लगता था, और मुझें भी। दिन ऐसे ढलता जैसे सिनेमा हॉल में उसके साथ  बैठकर पिक्चर देखते - देखते मेरा हाथ उसकी साइड के गर्दन तक पहुँचते ही पिक्चर ख़त्म होने लगती, लेकिन उसका किस अभी भी बाक़ी रह जाता। उसे चॉकलेट बहुत पसंद थे और मुझे वे। मुझे नही पता कि साप्ताहिक एतवार किसने बनाया होगा, उन दिनों रामपुरी चाकू साथ लिए घूमता था। और जाहिर सी बात है बनाने वालों को स्कूली प्यार हुआ भी नही होगा। यह दिन आम जेलों की तरह न होके तिहाड़ जेल में बदल जाता और माता - पिता इसके सीसीटीवी बन जाते। उसके प्यार में हाई स्कूल पास होना जैसे मानो देश कि सबसे बड़ी परीक्षा पास कर लिया हो और उसने विदेश की। उसके जाने के दो साल बाद इंटर में हाई स्कूल से कम नंबर आया लेकिन यूपी ट्रिपल आईटी में डेढ़ हजार वीं रैंक थी। उन दिनों में भूखहड़ताल करके ढेर सारा पैसा इकट्ठा कर लिया था जो उसके जन्मदिन में गिफ्ट देने के चक्कर में हाथ धोना पड़ा। कई दिन तक रात में नींद भी नही आती थी। शायद उस दिन मुझे लंबा राष्ट्रीय किस भी मिला था। 

      उसके जाने के बाद कितनों की सिगरेट का धुँवा हवाओं में सम्मिलित कर दिया। मेरा मिथक टूट गया और पहला प्यार पाने के लिए वह तमाम मैसेज, दोस्तो से अपनी फरयादी भेजवाई और खुद कितनी बार मिलने की कोशिश की लेकिन उसने कभी भी आँख न मिलाई। क्या वह मुझसे इतना नाराज थी। अगर मुझमें भी कोई सुपरपॉवर होता तो उस समय मे जाकर उस हड़बड़ाई और झुनझुनाहट वाली गलती को मार डालता जिसको आज न झेलता पड़ता। हमारे समाज में प्यार करने वालो को सबसे नीच समझा जाता है। यही से हमारी अधूरी यात्राएं शुरू हो जाती है।


......... डकनिया तालाब स्टेशन कोटा में पड़ता है और सिगरा बनारस में। 

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